हिम्मत और सच्ची मेहनत की कहानी
एक छोटे से गाँव में राहुल नाम का एक 9 साल का लड़का रहता था। राहुल बहुत मेहनती था, लेकिन उसे अक्सर अपने दोस्तों के मुकाबले खुद को कमज़ोर महसूस होता था। गाँव में एक दिन दौड़ की प्रतियोगिता होने वाली थी, और राहुल ने सोचा, “मैं भी दौड़ में हिस्सा लूंगा, लेकिन शायद मैं जीत नहीं पाऊंगा।”
राहुल के पापा ने उससे कहा, “बेटा, हार-जीत की चिंता मत करो। तुम अपनी पूरी मेहनत करो और कभी हार मत मानो। सच्ची मेहनत हमेशा रंग लाती है।” राहुल को पापा की बात सुनकर हिम्मत मिली, और उसने ठान लिया कि वो अपनी पूरी ताकत से दौड़ेगा।
दौड़ के दिन सब बच्चे बहुत उत्साहित थे। कुछ बच्चे तेज़ दौड़ रहे थे और राहुल उनसे पीछे था। लेकिन राहुल ने पापा की बात याद की, “हार मत मानो!” वह बिना रुके अपनी पूरी ताकत से दौड़ता रहा। धीरे-धीरे उसने एक-एक करके बच्चों को पीछे छोड़ना शुरू किया। आखिरी क्षणों में, उसने सबसे तेज़ दौड़कर पहला स्थान हासिल कर लिया!
गाँव के सभी लोग उसकी मेहनत और हिम्मत की तारीफ करने लगे। राहुल को यह समझ में आ गया कि हार या जीत से ज़्यादा ज़रूरी है कोशिश करना और मेहनत से कभी पीछे नहीं हटना।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अगर हम कभी हार न मानें और पूरी मेहनत करें, तो हम जरूर सफल हो सकते हैं।
